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ऐसा शिवलिंग जिसका दूसरा छोर पाताल से जुड़ा है

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शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह स्वयं धरती से प्रकट हुआ है।और शिवलिंग का दूसरा छोर पाताल से जुड़ा है

शिवली,कानपुर देहात,04 जुलाई 2023।कस्बा शिवली के जागेश्वर मंदिर में शिवलिंग के रूप में विराजे हैं भोलेनाथ। इसी शिवलिंग के नाम पर कस्बे का नामकरण शिवली किया गया है।
शिवली कस्बे के पांडव नदी के समीप प्राचीन जागेश्वर मंदिर स्थित है। इसी मंदिर के शिवलिंग की वजह से कस्बे का नाम शिवली पड़ा है। शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह स्वयं धरती से प्रकट हुआ है।और शिवलिंग का दूसरा छोर पाताल से जुड़ा है। यहां बड़ी संख्या में भक्त पूजन अर्चन के लिए पहुंचते है।
बताते चले की प्राचीन समय में बंजारों की एक गाय टीले पर एक जगह दूध गिराने लगती थी । चरवाहों को शंका होने पर उन लोगो ने यहाँ खुदाई करवाई तो शिवलिंग पाया गया।18वीं शताब्दी में शिव जी के परमभक्त देवनाथ दुबे ने मंदिर और तालाब का निर्माण करवाया था। अव यहाँ पर कई देवी देवताओ के मंदिर स्थापित हो चुके है। मंदिर के बारे में मान्यता है की यह भोले बाबा का सच्चा दरबार है। यहाँ श्रद्धालुओं का हुजूम लगा रहता है। भक्तों का मानना है कि जो बाबा भोलेनाथ से सच्चे दिल से मन्नत मागता है बाबा उसे पूरा करते है। सावन में हजारों की संख्या में दूर दराज के क्षेत्रों से यंहा महादेव के दर्शनों को श्रद्धालु पँहुचते है। शिवलिंग के अभिषेक से सुख सम्रद्धि की प्राप्ति होती है। मंदिर के पुजारी राकेश ने बताया मन्दिर में प्रतिवर्ष रक्षाबंधन के दिन बाबा भोले का श्रंगार होता है। इसके अलावा कई बड़े धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।

राजू शुक्ला/सुनाद न्यूज

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