बोरी वाली खाद का विकल्प बन रही बोतल वाली खाद
कानपुर देहात। यूरिया खाद के संकट से किसानों ने निपटना शुरू कर दिया। किसानों ने बोरी वाली खाद के विकल्प के तौर पर नैनो यूरिया व डीएपी का उपयोग करना शुरू कर दिया है। नैनो डीएपी व यूरिया लाने व ले जाने में भी आसान है। किसानों का कहना है कि नई तकनीक है। इसको अपनाने के लिए कुछ खेती में प्रयोग कर देखना चाहिए। इफको केंद्र में भी नैनो डीएपी,यूरिया की बिक्री भी बढ़ी है। केंद्र सरकार नैनो यूरिया व डीएपी खाद का प्रयोग बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास कर रही है। अब किसानों का झुकाव इसकी तरफ हो रहा है। बोरी वाली खाद के साथ ही बोतल वाली नैनो खाद भी उपयोग करने लगे है। जिससे किसानों की लागत कम हो रही है। और फायदा ज्यादा हो रहा है। इफको ई बाजार विक्रय अधिकारी अभिषेक पाण्डेय व सहायक विक्रय अधिकारी प्रतीक शुक्ला ने बताया कि बताया की एक बोरी डीएपी व एक बोतल नैनो डीएपी का का उपयोग 1 एकड़ खेती में किया जाता है जिससे किसान को करीब 750 रुपए की बचत होती है। इसी तरह दानेदार यूरिया बोरी से नैनो यूरिया का प्रयोग करने पर 45 रुपए की बचत होती है। साथ ही लाने व ले जाने में भी आसानी होती है।
बोले किसान
मक्का में नैनो उर्वरको के प्रयोग से बहुत अच्छी फसल खड़ी है-किसान सुनील मिश्रा,शिवली
पूरे साल अपने खेतों में नैनो उर्वरकों का इस्तेमाल किया,जिसके बेहतर परिणाम आए-किसान गुड्डू राजपूत,भउआपुरवा
नैनो यूरिया व डीएपी खाद के उपयोग।से कम लागत में अच्छी फसल कर रहे-किसान मनोज राजपूत,कड़री
शिवली कस्बा स्थित इफको ई बाजार केंद्र में नैनो यूरिया व डीएपी की मांग बढ़ी है। अप्रैल से अगस्त तक पांच माह में 609 बोतल यूरिया व डीएपी की बिक्री हो चुकी है।
अप्रैल 50 बोतल
मई 34 बोतल
जून 107 बोतल
जुलाई 195 बोतल
अगस्त। 223 बोतल
बोले अधिकारी
इस वर्ष अप्रैल माह से अगस्त तक नैनो उर्वरकों की 609 बोतल की बिक्री हुई है-अभिषेक पाण्डेय विक्रय अधिकारी,इफको बाजार शिवली
