इस तरह के विरोध पर विचार की जरूरत
संपादकीय-
भारत सरकार की अग्निपथ योजना का मसौदा सामने आते ही विरोध शुरू हो गया। योजना से सहमति असहमति हो सकती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सब को अपनी बात रखने का विरोध करने का अधिकार है। लेकिन जिस तरह से योजना के विरोध के नाम पर ट्रेनें व बसें जलाई जा रही है। यह कतई उचित नही है। इस तरह के विरोध से आम लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। साथ ही युवा वर्ग को समझना चाहिए कि सरकारी संपत्ति का नुकसान देश का नुकसान है। और यह सब विश्व में सबसे अनुशासित सेना में अग्निपथ भर्ती के विरोध के नाम पर किया जा रहा है। किसी भी देश के युवा उसकी ताकत होते हैं। हमारे युवा इस तरह का विरोध करेगे। यह बड़ी चिंता का विषय है। साथ ही उग्र विरोध पर पुलिस कानूनी कार्रवाई करेगी। जिससे युवाओं को ही परेशान होना पड़ेगा। युवाओं को चाहिए कि शान्ति पूर्वक अपना विरोध दर्ज कराएं। साथ ही देश में अमन चैन बरकरार रखना सबकी जिम्मेदारी है। सरकार को व्यापक पैमाने पर योजना की रूपरेखा का प्रचार प्रसार करना चाहिए। जिम्मेदारों को आम लोगों के बीच भी जाना चाहिए। सरकार की जिम्मेदारी कि जो सुधार व्यापक हित मे हो उन्हे लागू करना चाहिए। साथ ही पूर्व सैनिकों व बुद्धिजीवियों को भी युवाओं को समझाना चाहिए। इस तरह के विरोध का लाभ देश विरोधी तत्व भी उठाने के फिराक में रहते हैं। इसलिए सतर्कता के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। और सभी के बीच संवाद की जरूरी है।
लेखक-गीतेश अग्निहोत्री,वरिष्ठ पत्रकार
