संत हृदय नवनीत समाना

कानपुर देहात। जिनके चित्त में समता है, जिनका न कोई मित्र है और न ही शत्रु, ऐसे संत सरल हृदय और जगत के हितकारी होते है। उक्त बातें ऋषि वन धाम हनुमान कुटी गौ घाट आश्रम में हो रहे सीता राम नाम जप यज्ञ में आश्रम के 1008 स्वामी ज्ञानी दास जी महाराज ने अपने भक्तों के बीच कही।

मैथा स्थित बेहटा आश्रम में आयोजित 11 दिवसीय सीता राम नाम जप यज्ञ के तीसरे दिन अब भक्तों का शैलाब उमड़ रहा है। और भक्त यज्ञ शाला की परिक्रमा कर गुरु ज्ञानी दस जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त कर रहे है। स्वामी ज्ञानी दास ने अपने भक्तों को संतों के स्वभाव पर चर्चा कर बताया कि संत हृदय नवनीत समाना, संत अत्यंत सरल हृदय वाले होते है। जिनके चित्त में समता है जिनका न कोई मित्र है और न ही कोई शत्रु वह सभी को समान रूप से देखते हैं ऐसे संतों को सारा जगत प्रणाम करता है।बंदउं संत समान चित हित अनहित नहिं कोई संत सरल हृदय और जगत के हितकारी होते है। संत सरल चित जगत हित जानि सुभाउ सनेह। उन्होंने ने कहा कि सुधा सुरा सम साधु असाधू, जनक एक जग जलधि अगाधू संत और असंत जगत में एक साथ पैदा होते है। पर कमल और जोंक की तरह उनके गुण अलग-अलग होते हैं। संत अमृत के समान और असंत मदिरा के समान है दोनों को उत्पन्न करने वाला जगत रूपी अगाद समुद्र एक ही है। लेकिन दोनों में बडी विसमता है। संतो पर उन्होंने आगे कहा संत अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों के भलाई के लिए ही काम करते है। जिनके संपर्क में आने से दुरात्माओं का समन हो जाता है। ऐसी संत वाणी सुन वहां आए भक्तों के हृदय गद गद हो उठे।

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