अमेरिका का वेनेजुएला पर धावा
वेनेज़ुएला संकट | काराकास में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से दुनिया स्तब्ध
लैटिन अमेरिका की राजनीति इस समय एक बड़े भूचाल से गुजर रही है। वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास में अमेरिकी सेना द्वारा जमीनी और हवाई कार्रवाई किए जाने के दावों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इस ऑपरेशन में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर देश से बाहर ले जाया गया है।
काराकास में तेज धमाकों, कम ऊँचाई पर उड़ते विमानों और सैन्य गतिविधियों की खबरों के बीच शहर में अफरा-तफरी का माहौल रहा। कई इलाकों में संचार बाधित हुआ और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई।
वेनेज़ुएला सरकार का पक्ष
वेनेज़ुएला ने अमेरिकी दावों को सीधा सैन्य आक्रमण बताते हुए खारिज किया है। सरकार ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय मंचों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। काराकास का कहना है कि राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी संबंधी दावे अप्रमाणित हैं और इस पर स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
अमेरिका का तर्क
अमेरिकी नेतृत्व इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और अपराध-निरोध से जुड़ा कदम बता रहा है। हालांकि ऑपरेशन के विवरण, कानूनी आधार और हिरासत की जगह को लेकर अभी तक स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
क्यूबा, कोलंबिया सहित कई देशों ने चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और बल प्रयोग को लेकर बहस तेज होने के संकेत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ा सकता है।
असल सवाल
क्या किसी संप्रभु देश में इस तरह की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है
क्या रेजिम चेंज की राजनीति एक बार फिर खुले तौर पर सामने आ रही है
मादुरो की हिरासत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि कब और कैसे होगी
फिलहाल तथ्य और दावे आमने-सामने हैं। जरूरत है संयम, पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय नियमों के सम्मान की। आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ होगी, लेकिन इतना तय है कि वेनेज़ुएला संकट वैश्विक राजनीति में नए तनाव की रेखा खींच चुका है। साभार
